खिचड़ी का इतिहास लगभग 2500 पुराना है | हिन्दू धर्म में खिचड़ी को हर शनिवार को खाने का प्रथा है | उतर भारत में 14 जनवरी को मकर संक्राति मनाई जाती है | उस दिन खिचड़ी पकाई जाती है | 15 जनवरी को दक्षिण भारत में तीन दिन तक चलने वाली पोंगल पर्व शुरू हो जाती है | इस पर्व में भी खिचड़ी खाने की प्रथा है | और वहां के लोग खिचड़ी खाते है | खिचड़ी एक इंडियन भोजन है और खिचड़ी का इतिहास बहुत पुराना है | खिचड़ी का वैज्ञानिक तर्क यह है की 14 जनवरी जब सर्दी जाने लगती है और गर्मी का आवाहन होती है | सर्दी में लोग गर्म भोजन करते है पर जैसे ही गर्मी के दिन होने लगते है तो भोजन में बदलाव किया जाता है | ताकि शरीर आने वाले मौसम के हिसाब से डले | और धर्मिक मान्यता यह है की जैसे खिचड़ी में बहुत कुछ मिलकर पकाया जाता है और सब एक हो जाता है | उसी प्रकार हम लोग एक हो जाए किसी से भेद भाव नहीं हो क्योकि हम सभी एक परमेश्वर के संतान है | हमे किसी से भेद भाव करने का अधिकार नहीं है | और कहा जाता है की शनिवार के दिन खिचड़ी खाने से दोष रोग से मुक्ति मिलती है |
खिचड़ी शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है | खिचड़ी में दाल सब्जी मिलाकर पकाया जाता है | खिचड़ी में विटामिन कैलिशयम मैग्रीशियम फॉस्फोरस और फइबर्स के गुण पाया जाता है | खिचड़ी में ज्यादा मसाले का उपयोग नहीं होता है | इससे सेहत बनी रहती है | और खिचड़ी को बनाना भी आसान होता है | कुछ लोग को लगता है की खिचड़ी सिर्फ बीमार लोग खाते है पर ऐसा नहीं है | अगर स्वस्थ आदमी सप्ताह में दो से तीन दिन खिचड़ी का उपयोग करे तो वह बहुत से बीमारी से बच सकते है | खिचड़ी शरीर को बीमारी से सुरक्षित रखने में मदद करता है | जो आदमी खिचड़ी का नियमित सेवन करता है उसे वाट,पिर्त और कफ का बीमारी नहीं होता है खिचड़ी शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है | खिचड़ी का उपयोग से बीमारी से लड़ने का क्षमता अधिक होती है | अगर किसी आदमी का हजमा ठीक नहीं है तो वह खिचड़ी खा सकता है इससे राहत मिलेगी | आज के समय में जो लोग बाहर काम करते है उसे बाहर का खाना खाने पड़ता है | और बाहर में तो शुद्ध भोजन तो नहीं मिलेगा और तेल का भोजन करना पड़ता है | और पेट खराब हो जाता है | अगर खाना ठीक से पचता नहीं है तो खिचड़ी का उपयोग करे | खिचड़ी में बहुत से पोषक तप्व पाए जाते है | खिचड़ी आपके सेहत बनाये रखने में मदद करता है और भी बहुत से फायदे है |
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