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ESSAY ON DURGA PUJA . दुर्गा पूजा पर निबंध |

दोस्तों आज में आपको दुर्गा पूजा के बारे में महत्वपूर्ण और मजेदार जानकारी दुगा | दोस्तों जैसे की आप जानते ही है की दुर्गा पूजा हिन्दु का एक महत्वपूर्ण त्योहार है दुर्गा पूजा एक प्रसिद्ध और पवित्र त्योहार है | माँ दुर्गा शक्ति का प्रतीक है | दुर्गा पूजा को दुर्गात्सव और शरदोत्सव के नाम से भी जाना जाता है | जैसे की आप जानते ही है की यह त्योहार बुराई पर अच्छाई का जीत का प्रतीक  है  | इस अवसर पर माँ दुर्गा का नौ दिन पूजा होता है और दसवे दिन माँ का मूर्ति का विसर्जन होता है | दसवे दिन को विजयदसवीं या दशहरा के नाम से जाना जाता है | माँ दुर्गा पूजा का तैयारी महीनोभर पहले से होता है | दुर्गा पूजा बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है | जैसे की आप जानते ही है की हमारा देश विभिन्न संस्कृति और उसत्व से भरा है | आपना देश सबसे ज्यादा उत्सव मनाने वाला देश है | पुरे भारत में दुर्गा पूजा बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है | दुर्गा पूजा पूरे 10 दिन तक चलने वाला त्योहार है  | लेकिन माँ दुर्गा सातवे पूजा के दिन स्थापित होते है  | आखिरी के तीन दिन माँ दुर्गा का बहुत धूमधाम से पूजा होता है |  दुर्गा पूजा आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर माह में होती है  | जिसके लिए लोग महीनो पहले से तैयारिया शुरू कर देते है | माँ दुर्गा का नौ दिन पूजा करते है कुछ लोग नौ दिन तक उपवास रखते है और लोग आपने छाती पर कलश लेकर सोए रहते है | हम लोग माँ दुर्गा से आर्शीवाद सुख शांति का वरदान प्राप्त करते है | दोस्तों ऐसे तो माँ दुर्गा का पूजा पुरे भारत में होता है लेकिन बंगाल में यह त्योहार थोड़ा ज्यादा प्रसिद्द है | दुर्गा पूजा के दौरान मेला और मिनी बाजार लगता है | हर गली मोहल्ले में चहल झलक अलग ही दिखाई देता है | इस पूजा में पंडाल का सूरत अलग ही दिखाई देता है | पंडाल भव्यता दिखाई देता है | पंडाल कही पर हवा महल तो कही पर दिलवाड़ा मंदिर का झलक दिखाई देता है | माँ दुर्गा को शक्ति का देवी कहा जाता है | माँ दुर्गा को दस हाथ होते है | माँ दुर्गा शेर पर सवार होते है | और चेहरे पर एक मुस्कान होते है | दोस्तों इस रूप में माँ सन्देश यह देती है की चाहे कैसा भी परिस्थित हो हमे हमेशा मुस्कुराते रहना चाहिए | दोस्तों माँ दुर्गा के हाथो में अस्त्र रहता है | इसके पीछे माँ दुर्गा बहुत से सन्देश देते है | माँ दुर्गा का नौ रूपों का पूजा होता है | लोग बहुत ही सारदा के साथ इस पर्व को धूमधाम के साथ मनाते है | 


durga maa



माँ दुर्गा से जुड़ी हुई कहानी | 

दोस्तों एक बात तो पक्की है बुराई चाहे कितना भी ताकत क्यों ना हो लेकिन अंत में हमेशा अच्छाई का ही जीत होता है | एक बार महिषासुर नामक दैत्य का आतंक देवता को बहुत ही परेशान कर दिया था | महिषासुर ने कठिन तपस्या कर ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था | उसने वरदान में अजेय रहने का वरदान प्राप्त किया था | महिषासुर ने बह्रमा जी वरदान प्राप्त कर बहुत शक्तिशाली हो गया था | महिषासुर को वरदान था की हमे कोई देवता या दानव नहीं मर सके | वरदान प्राप्त कर महिषासुर को घमंड हो गया था | महिषासुर पृथ्वी पर आतंक मचाने लगा | एक बार उसने अचानक स्वर्ग पर हमला कर इन्द्र को हरा दिया और स्वर्ग पर कब्जा कर लिया |  सारे देवता ने मिलकर महिषासुर से युद्ध किया लेकिन महिषासुर से जीत नहीं सका | इससे सभी देवता परेशान होकर ब्रह्मा जी विष्णु जी और शंकर जी के पास सहायता मांगने पहुंचे | देवता ने माँ शक्ति का आराधना किया | ब्रह्मा जी विष्णु जी और शंकर जी के द्वारा एक आन्तरिक शक्ति का निर्माण किया गया | तब माँ दुर्गा प्रकट हुआ | माँ दुर्गा को अस्त्र प्रदान किया गया | इसके बाद माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिन तक भीषण युद्ध हुआ और दसवे दिन महिषासुर का संहार हो गया | इस लिए इस त्योहार को दशहरा और विजयदशमी के नाम से जाना जाता है | यह त्योहार अच्छाई का विजय का प्रतीक है | महिषासुर का वध करने के कारण माँ दुर्गा को असुर मर्दिनी नाम से भी जाना जाता है | 

दूसरी कहानी 


दूसरी पौराणिक कथाओं के अनुसार राम जी सीताजी को छुड़ाने और रावण का वध करने के लिए देवी के नवरूप का आराधना किया था | माँ देवी प्रसन्न होकर मर्यादा पुरुषोत्तम राम को वरदान दिया थे  | माँ का वरदान पाकर राम ने रावण का वध किया | इसी के याद में आज भी रावण का पुतला जलाने का प्राथा है | 
 
माँ का नौ रूप 

माँ दुर्गा का पहला स्वरूप माँ शैलपुत्री का है | इसके पीछे का कारण यह है की पर्वतराज हिमालय के यहां पुत्री के रूप में उतपन्न होने के कारण माँ का इस रूप को शैलपुत्री के नाम से पुकारा जाता है | यह स्वरूप वृषभ पर आरूढ़ दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में पुष्प कमल धारण किए हुए है | नवरात्री के पहली पूजा को इसी स्वरूप का पूजा होता है | इस दिन योगीजन आपने मन को मूलाधार चक्र में स्थित करते है | इसी दिन से शुरू होता है योग साधना | 

दूसरा स्वरूप - माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है | यहां पर ब्रह्मा शब्द का मतलव तपस्या से है | ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप का आचरण करने वाली | ब्रह्मचारिणी का यह स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत ही भव्य है | इस स्वरूप में माँ के दाए हाथ में जप का माला है और बाए हाथ में कमंडल है | माँ का यह स्वरूप भक्तो को अनंत फल प्रदान करने वाला है | इस स्वरूप का स्तुति करने से सदाचार वैराग्य त्याग और संयम होती है | इस चक्र में मन स्थित करने से माँ का कृपा  भक्ति को प्राप्त होता है | 

तीसरा स्वरूप - माँ का तीसरा स्वरूप चन्द्रघण्टा का है | तीसरी पूजा को माँ दुर्गा का इस स्वरूप का स्तुति होता है | इस स्वरूप  में माँ दुर्गा के मस्तक पर घंटे के आकार का चंदमा विरजमान होते है | इसी के कारण इस स्वरूप में माँ दुर्गा का नाम चंद्रघंटा पड़ा | इस स्वरूप में माँ दुर्गा का आराध्ना करने से मन को अलौकिक शक्ति प्राप्त होता है | इस स्वरूप में माँ का पूजा करने से लोक परलोक में भी परम कल्याण का प्राप्ति होती है | 


चौथा स्वरूप - माँ का चौथा स्वरूप कूष्माण्डा का है | चौथी पूजा को माँ का इस स्वरूप का पूजा होती है | माना जाता है की सृष्टि का उत्तपति के पूर्व चारो ओर अंधेरा था | तो माँ दुर्गा ने इस अंड यानी ब्रह्रांड का रचना की थी | इसी कारण इस स्वरूप का नाम कूष्माण्डा पड़ा | सृष्टि के उप्पति करने के कारण माँ दुर्गा को आदिशक्ति के नाम से भी जाना जाता है | इस स्वरूप में माँ दुर्गा का आठ भुजाए है |  और माँ दुर्गा सिंह पर सवार है | माँ के हाथो में चक्र गदा धनुष , कमंडल कलश वाण और कमल है | 


पांचवा स्वरूप - माँ दुर्गा का पांचवा स्वरूप स्कंदमाता का है | नवरात्रि के पांचवे दिन माँ स्कंदमाता का स्तुति होता है | स्कन्द माँ पार्वती और शंकरजी का पुत्र का नाम है | स्कन्द का माँ होने के कारण माँ का नाम स्कंदमाता पड़ा | माँ का इस स्वरूप में माँ का चार भुजाएं है | इस स्वरूप में माँ कार्तिक को गोद में लिए है | इस स्वरूप में माँ एक हाथ में सफेद का कमल है और दूसरे हाथ में लाल कमल पकड़ा हुआ है | इस रूप में भी माँ दुर्गा का वाहन सिंह है | यह स्वरूप सौमंडल का अधिष्ठात्री देवी है | इस रूप में माँ के चारो ओर सूर्य अलौकिक तेजोमयी मंडल सा दिखाई देता है | 

छठवां स्वरूप - माँ का छठा स्वरूप कत्यायनी का है | नवरात्री के छठा दिन माँ के इस स्वरूप का पूजा होता है | इस स्वरूप का पूजा करने से धर्म अर्थ मोक्ष का प्राप्ति होता है | कत्यायनी नाम पड़ने के कारण यह है की महर्षि कत्यायनी के यहां माँ पुत्री के रूप में यहां जन्म हुआ था | इसी के कारण इस स्वरूप को कत्यायनी माँ के नाम से जाना है | इस स्वरूप में माँ का स्वरूप स्वर्ण के भांति चमकीला है | इस स्वरूप में माँ को चार भुजा है | इस रूप में माँ का वाहन सिंह है | इस स्वरूप में माँ के हाथो में कमल का फूल और तलवार है | 

सातवां स्वरूप - माँ का सातवां स्वरूप कालरात्रि का है | नवरात्री का सातवां दिन कालरात्रि स्वरूप की पूजा होती है | इस स्वरूप का वर्ण अंधकार की भांति ,एकदम काला है | बाल बिखरे हुए है |  इस स्वरूप में माँ के गले में माला बिजली की भांति देदीप्यमान है | इस स्वरूप को असुरों का विनाश का स्वरूप से जाना गया है | इस स्वरूप में माँ को तीन आँख है | चार हाथ है जिनमे से एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में लौह अस्त्र है | इस स्वरूप में माँ का वाहन गधा है | 

आठवां स्वरूप -माँ का आठवां स्वरूप महागौरी का है | नवरात्री का आठवां दिन माँ महागौरी का स्तुति किया जाता है | इस स्वरूप में माँ का वर्ण सफेद है जैसे दोस्तों नाम से ही पता चलता है | इस स्वरूप में माँ का वस्त्र सफेद रंग का होता है और साथ ही सभी आभूषण सफेद  होता है इस स्वरूप में माँ का वाहन बैल होता है | इस स्वरूप में माँ का चार हाथ होते है | माँ के हाथ में त्रिशूल डमरू है | इस स्वरूप को तपस्या का स्वरूप कहा जाता है क्योकि इस स्वरूप का वर्णन इस प्रकार है | माँ ने शंकरजी को पाने के लिए हजारो का तपस्या किया जिसके कारण माँ का वर्ण काला हो गया फिर बाद में शंकरजी में गंगा के जल से इनका वर्ण फिर से गौरा किया | 


माँ का नौवां स्वरूप - माँ का नौवां स्वरूप सिध्ददात्री का है | सिध्ददात्री की पूजा अर्चना का विधान है | इस स्वरूप का महिमा बहुत है जैसे की नाम से ही पता चलता है की सिध्दिदात्री यानि सिध्दयो को पूरा करने वाला | यह स्वरूप में माँ कमल पर विराजमान है | 

दोस्तों आपने भारतीय संस्कृति में अनेक त्योहार मनाया जाता है जिनमे से दुर्गा पूजा एक है त्योहार मनाने के पीछे बहुत रहस्य छिपा होता है | भारत में जितना भी त्योहार है सब का अपना अपना महत्व है | सब त्योहार हमे बहुत कुछ का ज्ञान देता है | दुर्गा पूजा बुराई पर अच्छाई का जीत का प्रतीक है | जगह जगह पर रामलीला होता है | और दसवां दिन रावण का दहन किया जाता है | यह त्योहार हमे यह सन्देश देता है आपने अंदर जो रावण है उसे दहन करना है | रावण कोई बाहर का कोई राक्षक दैत्य नहीं है बल्कि आपने अंदर छिपा बुराई है और हमे आपने अन्दर के बुराई का विनाश करना है |

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3 टिप्पणियां

  1. आप अलग अलग कहानी दे कर बहुत अच्छे से माँ दुर्गा के बारे में बताया आपका बहुत धन्यबाद Subhash Kumar

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  2. इस टिप्पणी को ब्लॉग के किसी एडमिन ने हटा दिया है.

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