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CHHATH PUJA. छठ पूजा

दोस्तों आज में आपको छठ पूजा के बारे में बहुत ही मजेदार और महत्वपूर्ण जानकारी दूंगा | छठ पूजा हमारे संस्कृति का बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है | (CHHATH PUJA) छठ पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाता है | छठ पूजा में सूर्य देवता और छठ माता का आराधना (पूजा ) किया जाता है | छठ पूजा एक महापर्व है | यह पर्व पुरे चार दिन तक चलता है | नेपाल में भी यह त्योहार बहुत धूमधाम के साथ मनाते है | यह त्यौहार आपने देश के आलावा अनेक देशो में यह त्यौहार मनाया जाता है | जहां जहां आपने देश के लोग रहते है वह लोग भी यह त्यौहार बहुत धूमधाम के साथ मनाते है | 


दुर्गा पूजा के बाद काली पूजा उसके बाद यह त्यौहार मनाया जाता है | यह त्यौहार का शुरुआत नहाए - खाए से प्रारंभ होता है | छठ पूजा साल में दो बार मनाया जाता है | 


मुख्य रूप से यह त्योहार बिहार झारखण्ड और उत्तरप्रदेश में मनाया जाता है | chath puja को आस्था का महापर्व कहा जाता है | छठ पूजा चार दिन तक चलने वाला पर्व है | इसकी शुरुआत नहाय -खाय से होता है | इस दिन गंगा का स्नान कर खाना बनाया जाता है | लौकी भात खाने का परंपरा है | नहाय - खाय के बाद नमक नहीं खाया जाता है | 


दूसरे दिन को खरना कहा जाता है | खरना के दिन जिसके घर में छठ पूजा होता है | वह आपने घर में प्रसाद बनाते है | प्रसाद में खीर या रसया बनाया जाता है | खीर या रसया में चीनी का उपयोग नहीं किया जाता है बल्कि गुड़ का उपयोग किया जाता है | गुड़ हमारे सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक है | 


शाम को पूजा के बाद प्रसाद को ग्रहण किया जाता है | प्रसाद बहुत स्वादिष्ट और पैष्टिक होता है | प्रसाद खाने के साथ ही निर्जला व्रत का प्रारंभ होता है | 

तीसरे दिन को शाम को जब सूर्य डूबने लगता है उस समय जल और दूध के अर्ध दिया जाता है | सुप में नारियल केला ठेकुआ ईख नीबू और अनेक प्रकार का फल सुप में होता है | इस दिन सुबह से लोग सड़क का सफाई में लग जाते है क्योकि जब माथे पर पूजा का समान लेकर चलते है  उसको किसी प्रकार का दिक्कत न हो | और आने जाने में किसी को भी दिक्कत ना हो इसलिए सड़क का सफाई इत्यादि पहले से किया जाता है | 


चौथे दिन में सुबह सुबह स्नान कर गंगा के ओर प्रस्थान किया जाता है | कुछ लोग यह पर्व आपने घर में भी करते है घर में गड्डा कर गंगा का पानी देकर यह पर्व करते है जो लोग गंगाजी नहीं जा सकते वह घर में ही यह पर्व करते है | सुबह सुबह गंगाजी में जो व्रत करते है वह गंगाजी में स्नान करते है | इस दिन उगते हुए सूर्य में अर्ध दिया जाता है पानी और दूध से | 






छठ पूजा का शुरुआत | Beginning of Chhath puja. 

प्रथम देवासुर संग्राम में देवता असुर से हार गया था | अदिति माता ( देव माता ) ने सूर्य मंदिर में तेजस्वी पुत्र का प्राप्ति के लिए छठ माँ से आराधना की थी | अदिति माँ को पुत्र के रूप में आदित्य जी पैदा लिए जो बाद में आसुरो पर विजय दिलवाया | 


छठ पूजा क्यों मनाया जाता है और छठ पूजा का इतिहास Why Chhath Puja is celebrated and history of Chhath puja .| 


रामायण से | 
छठ पूजा मनाने के पीछे बहुत से कहानी है | एक कथा के अनुसार जब रामजी सीताजी  वनवास पूजा करके अयोध्या लौटे | रावण वध के पाप से मुक्ति के लिए ऋषि मुनियो के आदेश से राजसूय यज्ञ करवाए | पूजा के लिए मुग्दल ऋषि को आमंत्रित किया | मुग्दल ऋषि ने कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथि को सूर्य देव की उपासना करने आदेश दिया | इससे सीताजी ने मुग्दल ऋषि के आश्रम में रहकर छह दिनों तक पूजा की  | सप्तमी को सूर्येदय के समय फिर से अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया | 

महाभारत से |

महाभारत के परम योद्धा करण जो सूर्य देवता का बहुत बड़ा उपासक था | कर्ण रोज घंटो घंटो गंगाजी में रहकर अर्ध्य देते थे | सूर्य की कृपा से ही कर्ण महान योद्धा बना था | कर्ण एक महान योद्धा के साथ बहुत बड़ा दानी भी था | कर्ण को दानवीर कर्ण कहा जाता है | 

दूसरा कहानी 

जब पांडव सारा राजपथ जुआ में हार गए तब द्रोपदी ने छठ व्रत रखा था | इस व्रत से उनकी मनोकामना पूरी हुई थी और पांडव को सब कुछ वापस मिल गया | 


पुराणों से 

प्रियवत नमक एक राजा का कोई संतान नहीं था | इसके लिए प्रियव्रत ने बहुत कुछ किया संतान प्राप्ति के लिए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ | महर्षि कश्यप ने पुत्रयेष्ट यज्ञ करने के लिए प्रियवत को कहा | यज्ञ के बाद महारनी ने पुत्र को जन्म दिया | लेकिन पुत्र मरा हुआ जन्म लिया | जब यह समाचार नगर में फैला तो नगर में शोक सा फैल गया | जब मृत बच्चे को दफनाने की तैयारी होने लगा तो उसी समय एक ज्योतिर्मय विमान धरती में उतरा | इसमें बैठी देवी ने कहा मै षष्ठी देवी और पुरे विश्व के समस्त बालकों की रक्षिका हूँ  | फिर माँ ने पुत्र पर शिशु के मृत शरीर को स्पर्श किया | देवी के स्पर्श से बालक जीवित हो गया | तब से राजा ने अपने राज्य में यह त्योहार मनाने की घोषणा कर दिया | 


छठ पूजा 2020 में कब है 

इस बार छठ पूजा 20 , 21 November को है | 


इन बातो का ध्यान जरूर रखे | 


हमारे संस्कृति में कितना भी त्योहार होता है | सब के पीछे कुछ ना कुछ रहस्य जरूर  होता है | यह एक कठिन साधना का त्योहार है | यह त्योहार बहुत शारदा और धूमधाम से साथ मनाया जाता है | कुछ लोग ऐसे होते है छठ व्रत तो करते है लेकिन उसके पास साधन का कमी होता है | हमे उन लोगो का मदद करना चाहिए | जब हम लोग गंगाजी जाते है पूजा पाठ के बाद बहुत सारा गंदगी जमा हो जाता है | हमे गंगाजी को दूषित नहीं करना है बल्कि स्वच्छ रखना है | गंगाजी में बेकार सामान नहीं फेकना चाहिए | गंगाजी में बहुत भीड़ हो जाता है हमलोग को दुसरो का मदद करना चाहिए | 


निष्कर्ष 


यह एक महान त्योहार है हमे बहुत शारदा के साथ और साफ सफाई स्वच्छ के साथ छठ पूजा (CHHATH PUJA )मनाना चाहिए | 


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